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Nagnechi mataji ka itihas

 देवी #आवड़ #नागणेची माता का #सम्पूर्ण #इतिहास श्री आवड़ माता का अपरनाम #श्रीनागणेचियां माता का इतिहास, मान्यताएं व परम्परा :- लेखक आढ़ा) # डॉ नरेन्द्र सिंह आढ़ा (नरसा प्रधानाचार्य राउमावि बिकरनी सिंध के नानणगढ प्रवास के दौरान श्री आवडादि शक्तियां एक दिन हाकरा दरियाव (नदी) पर स्नान कर रहे थे। तभी नानणगढ के शासक अदन (ऊमर) सूमरा के पुत्र के नूरन के मित्र लूंचीया नाई ने इनकों स्नान करते हुए छिप कर देख लिया और उसने इनके कपड़ों को अपनी छडी से छू. दिया था। जब आवाडाधी बहनों संग स्नान करके बाहर आयी तो श्री आवडजी ने देखा कि वहां किसी पुरुष के पैरों के निशान पडे हुए थे। इस पर उन्होंने अपनी बहिनों को कहा कि उस पुरुष ने अपने कपड़ों को अपवित्र कर दिया हैं, अब ये कपडें हम पहन नहीं सकते हैं, इस जंगल में कपडें कहां से लाये जाये ? तब श्री आवडजी ने अपनी दैविक शक्ति से सभी बहिनों को काली नागिनों का रुप धारण करके झोपडे की ओर चलने का आदेश दिया। उधर लूंचीया नाई ने बादशाह के लडके नूरन के पास जाकर इनके अपूर्व रुप सौन्दर्य की जानकारी दे दी। इस पर वे दोनों घोडे पर सवार होकर हाकरा नदी पर आ गये। लेकिन वहां इ...